-Prashant Das
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#Corona
बिन बेचैनी चैन क्या
दुःस्वप्न बिना ये नैन क्या।
भूखे हैं, वो फिर भी चुप
बंदूकें क्या, तेरे केन क्या।
दिल के टुकड़े दूर फँसे
कारें क्या, अब ट्रेन क्या।
इंसानों से प्रेम न हो तो
क्या हिंदू और जैन क्या।
सबको मारा बारी-बारी
दास, स्मिथ, हुसैन क्या।
गहरी जेबें, पर दिल छोटे
लेन क्या, तब देन क्या।
इंतज़ार में बीत रहे हैं
क्या दुपहर, और रैन क्या।