-Prashant Das ‘साहिल’
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जिंदगी रवाँ-दवाँ, किश्त-किश्त जीता हूँ
बिखरी-सी ज़िल्द ये, ख्वाबों से सीता हूँ।
देख मुस्कुराते वो, हैं दिल में साजिशें
मैं जहाँ का जान बन, उनका फजीता हूँ।
खींचता तहें अपनी, सिलता लिबास मैं
मेरा पैबंद बना, औ’ मैं ही फीता हूँ।
भरा हूँ फ़िराक़ से, अश्कों सना हुआ
पिन्हाँ है आग आज, मैं सुलगा पलीता हूँ।
खोजता तबस्सुम हूँ, आँख मेरे अंगारे
अर्जुन की द्रौपदी, मैं राम जी की सीता हूँ।
हिंदी है जान मेरी, और उर्दू माशूका
मैं ही क़ुरआन बना, औ’ मैं ही गीता हूँ।
अरमानों से भरा, कितना मैं रीता हूँ
किश्तों शिकस्त पर, ‘साहिल’ मैं जीता हूँ।
1. रवां दवां Frenzied 2. फीता Embarrassment 3. फ़िराक़ Separation /renunciation 4. पिन्हां Hidden /latent 5. तबस्सुम Smile 6. रीता Empty
nazm #urdu #ghazal
वाह काव्यासटर साहेब। फ़िज़ा गूंज उठी आपकी वाहवाही में.. नज़्म आपकी तहज़ीब से जो तरजीह दी है। बहुत खूब 🌹🌹
शुक्रिया विजय भाई। आपका कमेंट भी शायराना है।